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    Home»भारत का इतिहास»मध्यकालीन भारत»भक्ति आन्दोलन | Bhakti Movement

    भक्ति आन्दोलन | Bhakti Movement

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    By Kerry on 27/11/2022 मध्यकालीन भारत
    भक्ति आन्दोलन | Bhakti Movement

    भक्ति आन्दोलन | Bhakti Movement | छठी शताब्दी में भक्ति आन्दोलन की शुरुआत तमिल क्षेत्र से हुई थी जो कर्नाटक व महाराष्ट्र तक फ़ैल गई थी

    भक्ति आन्दोलन | Bhakti Movement

    इस आन्दोलन का विकास बारह अलवार वैष्णव संतों व तिरसठ नयनार शैव संतों ने किया था. शिव नयनार व वैष्णव अलवार जैनियों व बौद्धों के अपरिग्रह को अस्वीकार कर इश्वर के प्रति व्यक्तिगत साधना को मुक्ति का मार्ग बतलाते थे.

    यह भी देखे :- तुगलक वंश के शासक | Rulers of Tughlaq Dynasty

    शैव संत अप्पार ने पल्लव राजा महेन्द्रवर्मन को शैव धर्म स्वीकार करवाया था. भक्ति कवि-संतों को संत कहा जाता था. इनके दो समूह थे. प्रथम वैष्णव संत थे जो महाराष्ट्र में लोकप्रिय हुए थे. वे भगवान विठोबा के भक्त थे. विठोबा पन्त के संत और उनके अनुनायी वरकरी या तीर्थयात्री पंथ कहलाते थे, क्योंकि हर वर्ष वे पंढरपुर की यात्रा पर जाते थे. दूसरा समूह पंजाब व राजस्थान के हिंदी भाषी क्षेत्रों में सक्रीय था. इनको निर्गुण भक्ति में आस्था थी.

    इसको दक्षिणी भारत से उत्तर भारत में रामानंद जी के द्वारा लाया गया था. बंगाल में कृष्ण की भक्ति के प्रारंभिक प्रतिपादकों में विद्यापति ठाकुर व चंडीदास थे.

    भक्ति आन्दोलन | Bhaktभक्ति आन्दोलन | Bhakti Movement  i Movement
    भक्ति आन्दोलन | Bhakti Movement

    रामानंद की शिक्षा से दो सम्प्रदायों का प्रादुर्भाव, सगुण जो पुनर्जन्म में विश्वास रखते थे व निर्गुण जो भगवन के निराकार रूप की पूजा करते थे.

    यह भी देखे :- बहमनी सल्तनत | Bahmani Sultanate

    सगुण संप्रदाय के सबसे प्रसिद्ध व्याख्याताओं में थे :- तुलसीदास जी व नाभादास जैसे रामभक्त व निम्बार्क वल्लभाचार्य, चैतन्य सूरदास व मीराबाई जैसे कृष्ण भक्त थे. निर्गुण संप्रदाय के सबसे प्रसिद्ध प्रतिनिधि कबीर थे, जिन्हें भावी उत्तर भारतीय पंथों का आध्यात्मिक गुरु माना गया है.

    शंकराचार्य के अद्वैतदर्शन के विरोध में दक्षिण में वैष्णव संतों द्वारा चार मतों की स्थापना की गई थी.

    यह भी देखे :- उत्तरकालीन मुगल सम्राट | later Mughal emperors

    भक्ति आन्दोलन FAQ

    Q 1. छठी शताब्दी में भक्ति आन्दोलन की शुरुआत किस क्षेत्र से हुई थी?

    Ans छठी शताब्दी में भक्ति आन्दोलन की शुरुआत तमिल क्षेत्र से हुई थी.

    Q 2. छठी शताब्दी का भक्ति आन्दोलन कहाँ तक फ़ैल गया था?

    Ans छठी शताब्दी का भक्ति आन्दोलन कर्नाटक व महाराष्ट्र तक फ़ैल गया था.

    Q 3. भक्ति आन्दोलन का विकास कितने अलवार वैष्णव संतों ने किया था?

    Ans भक्ति आन्दोलन का विकास बारह अलवार वैष्णव संतों ने किया था.

    Q 4. भक्ति आन्दोलन का विकास कितने नयनार शैव संतों ने किया था?

    Ans भक्ति आन्दोलन का विकास तिरसठ नयनार शैव संतों ने किया था.

    Q 5. पल्लव राजा महेन्द्रवर्मन को शैव धर्म किसने स्वीकार करवाया था?

    Ans शैव संत अप्पार ने पल्लव राजा महेन्द्रवर्मन को शैव धर्म स्वीकार करवाया था.

    Q 6. भक्ति किसको कहा जाता था?

    Ans भक्ति कवि-संतों को संत कहा जाता था.

    Q 7. कवि-संतों के कितने समूह थे?

    Ans कवि-संतों दो समूह थे.

    Q 8. वैष्णव संत कहाँ लोकप्रिय हुए थे?

    Ans वैष्णव संत थे जो महाराष्ट्र में लोकप्रिय हुए थे.

    Q 9. वैष्णव संत किसके भक्त थे?

    Ans वैष्णव संत भगवान विठोबा के भक्त थे.

    Q 10. कवि-संतों का दूसरा समूह किस क्षेत्रों में सक्रीय था?

    Ans कवि-संतों का दूसरा समूह पंजाब व राजस्थान में सक्रीय था.

    Q 11. भक्ति आन्दोलन को दक्षिणी भारत से उत्तर भारत में किसके द्वारा लाया गया था?

    Ans भक्ति आन्दोलन को दक्षिणी भारत से उत्तर भारत में रामानंद जी के द्वारा लाया गया था.

    Q 12. निर्गुण संप्रदाय के सबसे प्रसिद्ध प्रतिनिधि कौन थे?

    Ans निर्गुण संप्रदाय के सबसे प्रसिद्ध प्रतिनिधि कबीर थे.

    Q 13. भावी उत्तर भारतीय पंथों का आध्यात्मिक गुरु किसे माना गया है?

    Ans कबीर जी को भावी उत्तर भारतीय पंथों का आध्यात्मिक गुरु माना गया है.

    Q 14. रामानंद की शिक्षा से कितने सम्प्रदायों का प्रादुर्भाव हुआ था?

    Ans रामानंद की शिक्षा से दो सम्प्रदायों का प्रादुर्भाव हुआ था.

    Q 15. शंकराचार्य के अद्वैतदर्शन के विरोध में दक्षिण में वैष्णव संतों द्वारा कितने मतों की स्थापना की गई थी?

    Ans शंकराचार्य के अद्वैतदर्शन के विरोध में दक्षिण में वैष्णव संतों द्वारा चार मतों की स्थापना की गई थी.

    आर्टिकल को पूरा पढ़ने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.. यदि आपको हमारा यह आर्टिकल पसन्द आया तो इसे अपने मित्रों, रिश्तेदारों व अन्य लोगों के साथ शेयर करना मत भूलना ताकि वे भी इस आर्टिकल से संबंधित जानकारी को आसानी से समझ सके.

    यह भी देखे :- खिलजी वंश की शासन व्यवस्था | Khilji dynasty rule
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